बात इतनी सी थी पर बात हम न कह पाए उससे मिलने को मुलाक़ात हम न कह पाए। खुदकों इतना था भिगोया अश्क़ों से हमने तेज़ बारिश को भी बरसात हम न कह पाए। हम से वो हर दफ़ा हारा पर इस क़दर हारा उसकी किसी हार को मात हम न कह पाए। काश एक मर्तबा तो हमको देख लेता ढंग से उसके देखने को तो ख़ैरात हम न कह पाए। हमें उस बे-वफ़ा के जाने का दुख नहीं मगर ग़म है उसे ज़ोर से बद-ज़ात हम न कह पाए। -जॉनी अहमद
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Johnny Ahmed


